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Rawal Ratan Singh Biography in Hindi | रावल रतन सिंह जीवन परिचय

रावल रतन सिंह

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जीवन परिचय
वास्तविक नाम रत्नसिंह
व्यवसायशासक (चित्तौड़ के राजा)
व्यक्तिगत जीवन
जन्मतिथि 13 वीं सदी के मध्य (मलिक मोहम्मद जायसी के पद्मावत के अनुसार)
जन्म स्थानचित्तौड़, (वर्तमान में चित्तौड़गढ़) राजस्थान
मृत्यु तिथि14 वीं शताब्दी (1303) के प्रारम्भ में (मलिक मोहम्मद जायसी के पद्मावत के अनुसार)
मृत्यु स्थानचित्तौड़ (राजस्थान में आधुनिक चित्तौड़गढ़)
आयु (मृत्यु के समय) ज्ञात नहीं
मृत्यु कारणदेवपाल के साथ एक एकल युद्ध में मारे गए
साम्राज्य / गृहनगर मेदपाट (मेवाड़) साम्राज्य
राज-वंशगुहिल
परिवार पिता : समरसिंहा
माता : नाम ज्ञात नहीं
भाई : ज्ञात नहीं
बहन : ज्ञात नहीं
धर्म हिन्दू
जातिक्षत्रिय (राजपूत)
प्रेम संबन्ध एवं अन्य जानकारियां
वैवाहिक स्थिति विवाहित
गर्लफ्रेंड / मामलेनागमती (पहली पत्नी)
पद्मावती (दूसरी पत्नी)
रावल रतन सिंह पद्मावती के साथ
बच्चेज्ञात नहीं

रावल रतन सिंह

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रावल रतन सिंह से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ

  •  रत्नसिंह उर्फ रावल रतन सिंह का जन्म गहिला शासक समरसिंहा के घर हुआ था।
  • रतन सिंह ने अपने पिता के बाद 1302 ई. वीं के आसपास मेदपाट के गुहिल शासक बने।
  • रतन सिंह गुहिल राजवंश की रावल शाखा से संबंध रखते थे।
  • वह चित्रकूट किला (वर्तमान चित्तौड़गढ़) के शासक थे।
  • रतन सिंह गुहिल राजवंश के अंतिम शासक थे।
  • राजा रतन सिंह का वास्तविक नाम रतन सेन था, इसकी जानकारी 16 वीं शताब्दी के सूफी-कवि मलिक मोहम्मद जायसी द्वारा लिखित “पद्मावत” नामक एक महाकाव्य में दी गई है। यह महाकाव्य 1540 ई . वीं में अवधी भाषा में लिखा गया था।   पद्मावत (मलिक मोहम्मद जायसी)
  • मलिक मुहम्मद जयसी के “पद्मावत’ के मुताबिक एक तोते (हीरामणि) ने “पद्मावती’ की सुंदरता के बारे में राजा रतन सिंह को बताय था। जिसके कारण राजा रतन सिंह ने रानी पद्मावती से विवाह करने का निश्चय किया और अपने सोलह हजार सैनिकों के साथ सात समुद्र पार कर सिंहल साम्राज्य की ओर प्रस्थान किया।
  • रतन सिंह ने अपने सोलह हजार सैनिकों के साथ सिंहल साम्राज्य पर आक्रमण किया, जिसके परिणामस्वरूप राजा रतन सिंह को पराजय का सामना करना पड़ा और उन्हें क़ैद कर लिया गया।
  • जैसे ही रतन सिंह को फांसी दी जाने वाली थी, उनके साम्राज्य के गायक (Royal Bard) ने वहां मौजूद लोगों को बताया कि रतन सिंह दरअसल चितौड़ के राजा हैं। यह सुनने के बाद, गंधर्व सेन ने पद्मावती का विवाह रतन सिंह के साथ करने का निर्णय लिया और साथ-ही-साथ रतन सिंह के साथ आए हुए, सोलह हजार सैनिकों का विवाह भी सिंहल साम्राज्य की सोलह हजार पद्मनियों के साथ सम्पन्न करवा दिया।
  • जल्द ही,रतन सिंह को एक संदेशवाहक पक्षी के द्वारा संदेश प्राप्त हुआ कि उनकी पहली पत्नी नागमती राजा रतन सिंह के लिए वापस चितौड़ लौट रही हैं। यह संदेश प्राप्त करने के पश्चात् रतन सिंह ने तुरंत चितौड़ लौटने का फैसला किया। चितौड़ के रास्ते पर, समुद्र देवता ने उन्हें दुनिया की सबसे खूबसूरत औरत को जीतने के लिए अत्याधिक गर्व पैदा करने के लिए रतन सिंह को दंडित करने का निर्णय किया। हालांकि, रतन सिंह ने समुद्र के देवता को चितौड़ में बीती अपनी दुःख भरी व्यथा को बताया, अंत में समुद्र देवता ने उन्हें चितौड़ जाने के लिए लौटा दिया।
  • कुछ दिन बाद, रतन सिंह ने अपने साम्राज्य से एक ब्राह्मण (राघव चेतन) को निर्वासित किया। वह अपनी रक्षा व सुरक्षा हेतु दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी की अदालत में पहुंचा और वहां पद्मावती के सौंदर्य रूप को अलंकृत कर खिलजी को पद्मावती के प्रति आकर्षित किया।
  • अलाउद्दीन ने पद्मावती को हासिल करने की ठान ली। और चितौड़ पर कब्जा कर लिया। जब रतन सिंह ने अलाउद्दीन को पद्मावती को सौपनें से इनकार कर दिया, तो अलाउद्दीन ने छलपूर्वक रतन सिंह को बंदी बना लिया और उसे दिल्ली ले गया।
  • पद्मावती ने रतन सिंह के दो वफादारों “गोरा” और “बादल” को अलाउद्दीन खिलज़ी के चंगुल से राजा रतन सिंह को बचाने के लिए भेजा। क्योंकि गोरा और बादल राजा रतन सिंह को रानी पद्मावती की महिला साथियों से बचाया करते थे। अंत में, गोरा खिलजी के सैनिकों के साथ लड़ते हुए वीर गति को प्राप्त हुए, जबकि बादल और रतन सिंह सुरक्षित रूप से चितौड़ पहुँच गए।
  • जब रतन सिंह को दिल्ली में कैद किया गया था, उसी समय चितौड़ के पड़ोसी राज्य – कुंभलनेर के राजा देवपाल का भी रानी पद्मावती के प्रति आकर्षण हो गया था। जिसके चलते राजपूत राजा देवपाल ने एक दूत के द्वारा रानी पद्मावती को विवाह का प्रस्ताव भेजा।
  • इसी बीच, अलाउद्दीन ने फिर से पद्मवती को प्राप्त करने के लिए चित्तौड़ पर आक्रमण किया। अलाउद्दीन से हारने के बाद पद्मावती और नागमती ने रतन सिंह के अंतिम संस्कार के दौरान अपना आत्म-दाह (जौहर) कर दिया।  रानी पद्मावती जौहर करती हुई
  • चितौड़ की अन्य महिलाओं ने भी रानी पद्मावती की भांति अपने आत्मसम्मान के लिए (जौहर) को प्रतिबद्ध किया, और अलाउद्दीन से लड़ते- लड़ते चित्तौड़ के सभी लोगों की मृत्यु हो गई, परिणामस्वरूप अलाउद्दीन को चितौड़ से सिर्फ खाली किला ही हासिल हुआ।  चित्तौड़ की महिलाएं जौहर करती हुई
  • सन 1303 ई. वीं में, अलाउद्दीन द्वारा चितौड़ पर किया गया आक्रमण एक ऐतिहासिक घटना है। किन्तु राजा रतन सिंह और रानी पद्मनी की कहानी का कोई ऐतिहासिक बुनियाद नहीं है। यहां तक कि आधुनिक इतिहासकारों एवं इतिहासविदों ने इसकी प्रामाणिकता को खारिज कर दिया है।
  • वर्ष 2017 में, संजय लीला भंसाली के द्वारा “पद्मावती” शीर्षक वाली एक फिल्म बनाई गई, हालांकि बाद में, विवादों में आने पर फिल्म का शीर्षक “पद्मावती” से बदलकर “पद्मावत” रख दिया गया। इस फ़िल्म में मुख्य भूमिका में दीपिका पादुकोण (पद्मवती), शाहिद कपूर( राणा रतन सिंह) और रणवीर सिंह ( सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी) हैं।  पद्मावत
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