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Sanjay Gandhi Biography in Hindi | संजय गांधी जीवन परिचय

संजय गांधी

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जीवन परिचय
वास्तविक नाम संजय गांधी
उपनाम ज्ञात नहीं
व्यवसाय पूर्व भारतीय राजनीतिज्ञ
राजनीतिक पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी चिन्ह
राजनीतिक यात्रा • 20 वर्ष की आयु में संजय राजनीति से जुड़े।
• वर्ष 1970 के दशक में, वह भारतीय युवा कांग्रेस के नेता बने।
• जनवरी 1980 में, वह अमेठी के निर्वाचन क्षेत्र से एक सांसद के रूप में चुने गए और उसी वर्ष जून तक ही कार्य किया और जून में ही उनका निधन हो गया।
शारीरिक संरचना
लम्बाई से० मी०- 176
मी०- 1.76
फीट इन्च- 5’ 9”
वजन/भार (लगभग)70 कि० ग्रा०
आँखों का रंग काला
बालों का रंग काला
व्यक्तिगत जीवन
जन्मतिथि 14 दिसंबर 1946
आयु (23 जून 1980 के अनुसार)33 वर्ष
जन्मस्थान नई दिल्ली, ब्रिटिश भारत
मृत्यु तिथि23 जून 1980
मृत्यु स्थलनई दिल्ली, भारत
मृत्यु का कारणविमान दुर्घटना
राशि धनु
राष्ट्रीयता भारतीय
गृहनगर नई दिल्ली, ब्रिटिश भारत
स्कूल/विद्यालय Welham Boys' School, Dehradun
दून स्कूल, देहरादून
महाविद्यालय/विश्वविद्यालयज्ञात नहीं
शैक्षिक योग्यता ऑटोमोबाइल में इंजीनियरिंग की डिग्री, प्रशिक्षित पायलट
परिवार पिता - फ़िरोज़ गांधी (पूर्व भारतीय राजनीतिज्ञ)
माता- इंदिरा गांधी (पूर्व भारतीय राजनीतिज्ञ)
फ़िरोज़ गांधी और इंदिरा गांधी
भाई- राजीव गांधी (पूर्व भारतीय राजनीतिज्ञ और प्रशिक्षित पायलट)
स्वर्गीय राजीव गांधी
बहन- कोई नहीं
धर्म हिन्दू
जाति ब्राह्मण
विवाद • वर्ष 1971 में, इंदिरा गांधी की अगुवाई वाली सरकार ने एक स्वदेशी कार का निर्माण करने का प्रस्ताव रखा, जिसे मध्यवर्गीय भारतीय खरीद सकें। जिसके चलते इसका नाम पीपल्स कार रखा गया और उसी वर्ष जून में मारुति लिमिटेड नामक एक मोटर वाहन कंपनी को कंपनी अधिनियम के तहत शामिल किया गया। जिसमें संजय गांधी को फर्म के प्रबंध निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया, जिसकी व्यापक रूप से आलोचना की गई, क्योंकि उन्हें इस क्षेत्र में कोई पूर्व अनुभव नहीं था।
• आपातकाल से पहले और उसके बाद संजय गांधी इंदिरा गांधी के सलाहकार के रूप में नियुक्त किए गए। पुराने वफादारों के दलबदल करने से संजय गांधी का इंदिरा गांधी और उनकी सरकार पर प्रभाव एकदम बढ़ गया था, हालांकि वह ऐसे कोई भी आधिकारिक और चयनित पद पर कार्यरत नहीं थे। अनुभवहीन होने के कारण इंदिरा गांधी की अनेक शक्तियों को उन्होंने बहुत अच्छे से प्रयोग किया। सूत्रों के मुताबिक, आपातकाल के दौरान उन्होंने अपने दोस्त बंशीलाल के साथ मिलकर भारत को चलाया था। उस समय संजय गांधी का अपनी माँ इंदिरा गांधी पर पूर्ण नियन्त्रण था। इसके चलते उन्होंने पार्टी में अनेक युवा लोगों को शामिल किया, जिसमें गुंडा-माफिया जैसे लोग शामिल थे, जो लोगों को डराने-धमकाने का काम करते थे, जिसके चलते उन्हें कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
प्रेम संबन्ध एवं अन्य जानकारियां
वैवाहिक स्थिति विवाहित
बॉयफ्रैंड्स एवं अन्य मामले मेनका गांधी
पत्नी मेनका गांधी, भारतीय राजनीतिज्ञ (विवाह तिथि 1974 -1980)
संजय गांधी अपनी पत्नी के साथ
बच्चे बेटा : वरुण गांधी
संजय गांधी का बेटा वरुण गांधी
बेटी : कोई नहीं

संजय गांधी

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संजय गांधी से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ

  • क्या संजय गांधी धूम्रपान करते थे ? ज्ञात नहीं
  • क्या संजय गांधी शराब पीते थे ? ज्ञात नहीं
  • संजय हमेशा से ही कारों और हवाई जहाजों में दिलचस्पी रखते थे।
  • उन्होंने किसी भी कॉलेज में दाखिला नहीं लिया, क्योंकि वह अपना करियर ऑटोमोटिव क्षेत्र में बनाना चाहते थे। जिसके चलते उन्होंने इंग्लैंड के Rolls-Royce Crewe में एक प्रशिक्षु के रूप में कार्य किया।
  • एक कुशल राजनीतिज्ञ के अलावा वह एक प्रशिक्षित पायलट भी थे।
  • संजय ने मेनका गांधी से विवाह किया, जो उनके मुकाबले 10 साल छोटी थी।
  • जब वर्ष 1975 में अमृत नाहटा द्वारा निर्देशित फिल्म “किस्सा कुर्सी का” (जो कि इंदिरा गांधी और संजय गांधी के ऊपर एक कटाक्ष थी) को सेंसर बोर्ड़ के पास सत्यापन हेतू भेजा गया, तो बोर्ड ने फिल्म को सात सदस्यीय संशोधन समिति में स्थानांतरित कर दिया और उसके बाद फिल्म को सरकार के पास भेजा गया। इसके उपरांत फिल्म में सरकार द्वारा 51 आपत्तियां दर्ज की गईं। जवाब में, निर्देशक ने कहा कि पात्र काल्पनिक हैं और यह किसी की भावनाओं को चोट नहीं पहुँचाते हैं। जिसके चलते गुड़गांव में मारुति के कारखाने में फिल्म के सभी प्रिंट और मास्टर प्रिंट जला दिए गए। वर्ष 1997 में भारत सरकार द्वारा स्थापित एक समिति ने संजय गांधी और तत्कालीन सूचना एवं प्रसारण मंत्री वी. सी. शुक्ला को दोषी पाया था। फरवरी 1979 में संजय और शुक्ला को क्रमशः एक महीने और दो साल की कारावास की सजा सुनाई गई थी, जिसमें उन्हें जमानत नहीं दी गई। बाद में, यह फैसला ख़ारिज कर दिया गया।
  • मार्च 1977 में, वह बाल-बाल बचे, जब वह चुनाव के लिए प्रचार कर रहे थे, कि अचानक एक अज्ञात बंदूकधारी ने दक्षिण-पूर्व दिल्ली के पास उनकी कार पर गोलीबारी करनी शुरू कर दी।
  • जून 1980 में, जब वह दिल्ली फ्लाइंग क्लब के द्वारा एक नए विमान की यात्रा कर रहे थे, तब उनके विमान का संतुलन बिगड़ गया और उन्होंने अपना नियंत्रण खो दिया। जिसके चलते विमान हवा में ही क्षतिग्रस्त हो गया और उनकी मृत्यु हो गई।
  • ऐसा माना जाता था कि इंदिरा गांधी के बाद संजय गांधी ही भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के उत्तराधिकारी होंगे, परन्तु एक घातक विमान दुर्घटना में उनकी मृत्यु हो गईं, जिसके चलते उनके भाई राजीव गांधी को पार्टी का भावी उत्तराधिकारी नियुक्त किया गया।
  • संजय की मृत्यु के तुरंत बाद, मेनका गांधी, उनकी 23 वर्षीय विधवा और उनके पुत्र वरुण को प्रधानमंत्री के घर से बेदखल कर दिया गया। जिसके चलते मेनका ने बाद में अपनी स्वयं की राजनीतिक पार्टी “संजय विचार मंच” का गठन किया, जिसने कई गैर-कांग्रेस विरोधी सरकारों में भी कार्य किया। उसके बाद वह अपने पुत्र के साथ भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
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