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Bhimrao Ambedkar Biography in Hindi | डॉ भीमराव अम्बेडकर जीवन परिचय

Dr Bhimrao Ambedker

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जीवन परिचय
वास्तविक नाम भीमराव रामजी अम्बेडकर
उपनाम बाबा साहेब, बोधिसत्त्व, भीम, भिवा
व्यवसाय भारतीय विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, शिक्षाविद, समाजसुधारक और भारत के प्रथम कानून मंत्री
प्रमुख कार्य• उन्होंने अछूतों (दलितों) के खिलाफ सामाजिक भेद भाव के विरुद्ध अभियान चलाया।
• उन्होंने भारतीय संविधान तथा राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रसिद्ध विचार• बुद्धि का विकास मानव-अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।
• शिक्षित बनो ! संगठित रहो ! संघर्ष करो !
• शिक्षा शेरनी का दूध है, इसे जो पिएगा वह शेर की तरह जरूर दहाड़ेगा।
• इतिहास बताता है कि जहां नैतिकता और अर्थशास्त्र के बीच संघर्ष होता है, वहाँ जीत हमेशा अर्थशास्त्र की होती है।
• किसी भी कौम का विकास उस कौम की महिलाओं के विकास से होता है।
व्यक्तिगत जीवन
जन्मतिथि 14 अप्रैल 1891
आयु (मृत्यु के समय)65 वर्ष
जन्मस्थान मध्य भारत प्रांत (अब मध्य प्रदेश में) में सैन्य छावनी महू
मृत्यु तिथि6 दिसम्बर 1956
मृत्यु स्थलदिल्ली, भारत
मृत्यु का कारणमधुमेह की लम्बी बीमारी से
समाधि स्थलचैत्यभूमि, मुंबई
बाबा साहेब अम्बेडकर का समाधि स्थल
राशि मेष
हस्ताक्षर भीमराव अम्बेडकर हस्ताक्षर
राष्ट्रीयता भारतीय
गृहनगर मध्य भारत प्रांत (अब मध्य प्रदेश में) में सैन्य छावनी महू
स्कूल/विद्यालय सतारा स्कूल, महाराष्ट्र, भारत
सरकारी हाई स्कूल, एल्फिंस्टोन
महाविद्यालय/विश्वविद्यालयबॉम्बे विश्वविद्यालय
कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क
लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स
ग्रेसिन्न, लंदन
बर्लिन विश्वविद्यालय
ओस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद, भारत
शैक्षिक योग्यता बॉम्बे विश्वविद्यालय से स्नातक
बॉम्बे विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र, राजनीतिक शास्त्र, अर्थशास्त्र और मानव विज्ञान में परास्नातक
कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क से पीएच.डी.
लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से एम.एससी.
ग्रेसिन्न, लंदन से बैरिस्टर (Barrister-at-law)
लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से डी. एससी.
कोलंबिया विश्वविद्यालय, न्यूयॉर्क से एलएल.डी.
ओस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद, भारत से डी.लिट.
परिवार पिता - रामजी सकपाल (सूबेदार)
माता- भीमाबाई सकपाल
भीमराव अम्बेडकर के माता-पिता
भाई- बाला राव और आनंद राव
बहन - मंजुला, तुलसी, गंगाबाई लक्षगावडेकर, रामाबाई मालवनकर,
दादा - मालोजी सकपाल (सैनिक)
धर्म हिन्दू
बौद्ध (धर्म परिवर्तन)
जाति अनुसूचित जाति (महार)
शौक/अभिरुचिपुस्तकें पढ़ना, संगीत सुनना और यात्रा करना
पसंदीदा चीजें
पसंदीदा व्यक्तिगौतम बुद्ध, हरिश्चंद्र, कबीरदास
प्रेम संबन्ध एवं अन्य जानकारियां
वैवाहिक स्थिति विवाहित
पत्नी रमाबाई अम्बेडकर (विवाह 1906 - निधन 1935)
भीमराव अम्बेडकर की पहली पत्नी
डॉ सविता अम्बेडकर (विवाह 1948)
भीमराव अम्बेडकर की दूसरी पत्नी
बच्चे बेटा - यशवंत राव अम्बेडकर (मीराबाई के बेटे)
भीमराव अम्बेडकर के बेटे यशवंत राव अम्बेडकर
बेटी - कोई नहीं

Dr Babasaheb ambedker

डॉ भीमराव अम्बेडकर से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ

  •  भीमराव अम्बेडकर का जन्म मध्य भारत प्रांत (अब मध्य प्रदेश में) सैन्य छावनी “महू” में एक मराठी परिवार में हुआ था।
  •  वह रामजी मालोजी (ब्रिटिश सेना में सूबेदार) और भीमाबाई की 14 वीं संतान थे।
  • भीमराव अम्बेडकर हिंदू “महार” जाति से संबंध रखते थे, जिसे समाज में अछूत जाति कहा जाता था और इस कारण उन्हें सामाजिक और आर्थिक रूप से भेदभाव का सामना करना पड़ता था।
  • बचपन से ही भीमराव गौतम बुद्ध की शिक्षा से प्रभावित थे। महात्मा गौतम बुद्ध
  • अनुसूचित जाति से संबंधित होने के कारण उन्हें सामाजिक प्रतिरोध का सामना करना पड़ता था और स्कूली पढ़ाई में सक्षम होने के बावजूद छात्र भीमराव को अस्पृश्यता के कारण कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। एक दिन रामजी सकपाल ने भीमराव का उपनाम ‘सकपाल’ की बजाय ‘आंबडवेकर’ लिखवाया था, क्योंकि कोकण प्रांत में उपनाम में अपने गांव के नाम लगाते हैं। भीमराव के पिता आंबडवे गांव से थे। भीमराव अम्बेडकर की बचपन की फोटो
  • वर्ष 1897 में, भीमराव अपने परिवार साथ मुंबई चले गए और वहां एल्फिंस्टन हाई स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की। जहां अम्बेडकर एक मात्र अस्पृश्य छात्र थे।
  • अप्रैल 1906 में, जब वह 15 वर्ष के थे, तब उनका विवाह नौ वर्ष की लड़की रमाबाई से हुआ।
  • वर्ष 1907 में, उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और अगले वर्ष एल्फिंस्टन कॉलेज में प्रवेश किया, जो कि बॉम्बे विश्वविद्यालय से संबंधित था और ऐसा करने वाले वह पहले अस्पृश्य छात्र बने। एल्फिंस्टन कॉलेज, मुंबई
  • वर्ष 1913 में, उन्हें सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय (बड़ौदा के गायकवाड़) द्वारा स्थापित एक योजना के तहत न्यूयॉर्क स्थित कोलंबिया विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर शिक्षा के अवसर प्रदान करने हेतू तीन साल के लिए ₹755 प्रति माह बड़ौदा राज्य की छात्रवृत्ति प्रदान की गई थी। जिसके चलते 22 साल की उम्र में वह संयुक्त राज्य अमेरिका चले गए। सयाजीराव गायकवाड़ तृतीय (बड़ौदा के गायकवाड़)
  • भीमराव अम्बेडकर जॉन डेवी के लोकतंत्र निर्माण कार्य से काफी प्रभावित थे। जॉन डेवी
  • 9 मई को, उन्होंने मानव विज्ञानी अलेक्जेंडर गोल्डनवेइज़र द्वारा आयोजित एक सेमिनार में “भारत में जातियां: प्रणाली, उत्पत्ति और विकास” पर एक लेख प्रस्तुत किया, जो उनका पहला प्रकाशित कार्य था। भीमराव अम्बेडकर का पहला प्रकाशित लेख
  • अक्टूबर 1916 में, डॉ॰ भीमराव अम्बेडकर लंदन चले गए और वहाँ “ग्रेज़ इन” में बैरिस्टर कोर्स (विधि अध्ययन) के लिए दाखिला लिया और साथ ही लंदन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में दाखिला लिया। जहां उन्होंने अर्थशास्त्र की डॉक्टरेट थीसिस पर काम करना शुरू किया। Dr. B. R. Ambedkar with his professors and friends from the London School of Economics and Political Science, 1916-17
  • जून 1917 में, वह अपना अध्ययन अस्थायी रूप से बीच में ही छोड़ कर भारत लौट आए।
  • भारत लौटने पर भीमराव बड़ौदा राज्य के सेना सचिव के रूप में कार्य करने के लगे। जहां कुछ दिन बाद उन्हें पुनः भेदभाव का सामना करना पड़ा। अंत में, बाबा साहेब ने नौकरी छोड़ दी और एक निजी ट्यूटर और एक लेखाकार के रूप में काम करने लगे।
  • वर्ष 1918 में, वह मुंबई में सिडेनहम कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड इकोनॉमिक्स में राजनीतिक अर्थव्यवस्था (Political Economy) के प्रोफेसर बने। जहां उनका अन्य प्रोफेसरों के साथ पानी पीने के जॉग को साझा करने पर विरोध किया गया।
  • भारत सरकार अधिनियम 1919 को तैयार कर रही “साउथबरो समिति” के समक्ष जब भीमराव अम्बेडकर को गवाही देने के लिए आमंत्रित किया गया। तब अम्बेडकर ने दलितों और अन्य धार्मिक समुदायों के लिए पृथक निर्वाचिका (separate electorates) और आरक्षण देने की वकालत की। dr. ambedkar with the soldiers of mahar regiment and movement
  • वर्ष 1920 में, उन्होंने मुंबई में साप्ताहिक “मूकनायक” के प्रकाशन का कार्य शुरू किया। जिसका इस्तेमाल अम्बेडकर रूढ़िवादी हिंदू राजनेताओं व जातीय भेदभाव से लड़ने के प्रति भारतीय राजनैतिक समुदाय की अनिच्छा की आलोचना करने के लिए करते थे। Cover page of Dr. Babasaheb Ambedkar Mooknayak
  • बॉम्बे हाईकोर्ट में कानून की प्रैक्टीस करते हुए, उन्होंने अस्पृश्यों की शिक्षा को बढ़ावा दिया। उनका पहला संगठित प्रयास “बहिष्कृत हितकारिणी सभा” की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शिक्षा और सामाजिक-आर्थिक सुधार को बढ़ावा देना था। Ambedkar Barrister
  • वर्ष 1930 में, भीमराव अम्बेडकर ने कालाराम मंदिर सत्याग्रह को शुरू किया। जिसमें लगभग 15,000 स्वयंसेवको ने प्रतिभाग लिया था। यही-नहीं इस आंदोलन में जुलूस का नेतृत्व एक सैन्य बैंड ने किया था और उसमें एक स्काउट्स का बैच भी शामिल था। पहली बार पुरुष और महिलाएं भगवान का दर्शन अनुशासन में कर रहे थे। जब सभी आंदोलनकारी मंदिर के गेट तक पहुंचे, तो उन्हें गेट पर खड़े ब्राह्मण अधिकारियों द्वारा गेट बंद कर दिया गया। विरोध प्रदर्शन उग्र होने पर गेट को खोल दिया गया। जिसके परिणामस्वरूप दलितों को मंदिर में प्रवेश की इजाजत मिलने लगी। Kalaram Mandir Kalaram Temple Satyagrah
  • वर्ष 1932 में, जब ब्रिटिशों ने अम्बेडकर के साथ सहमति व्यक्त करते हुए, अछूतों को “पृथक निर्वाचिका” देने की घोषणा की, तब महात्मा गांधी ने इसका विरोध करते हुए, पुणे की यरवदा सेंट्रल जेल में आमरण अनशन शुरु किया।
  • वर्ष 1936 में, भीमराव अम्बेडकर ने “स्वतंत्र लेबर पार्टी” की स्थापना की, जिसने वर्ष 1937 में केन्द्रीय विधान सभा चुनावों मे 15 सीटें जीती थी।
  • वर्ष 1941 और 1945 के बीच में उन्होंने बड़ी संख्या में बहुत सी विवादास्पद पुस्तकें और पर्चे प्रकाशित किए, जिनमे “थॉट्स ऑन पाकिस्तान” भी शामिल है। जिसमें वह मुस्लिम लीग के मुसलमानों के लिए एक अलग देश पाकिस्तान की मांग की आलोचना करते हैं।
  • भीमराव अम्बेडकर इस्लाम और दक्षिण एशिया के रीतियों के भी बड़े आलोचक थे। उन्होने भारत विभाजन का तो पक्ष लिया, परन्तु मुस्लिमो में व्याप्त बाल विवाह की प्रथा और महिलाओं के साथ होने वाले दुर्व्यवहार की घोर निंदा की।
  • 15 अगस्त 1947 में भारत की स्वतंत्रता के बाद, कांग्रेस के नेतृत्व वाली नई सरकार जब अस्तित्व मे आई तब उन्होंने भीमराव अम्बेडकर को देश के पहले कानून मंत्री के रूप में सेवा करने के लिए आमंत्रित किया। B.R.Ambedkar oath ceremony of Law Minister
  • उसके बाद अम्बेडकर के द्वारा तैयार किए गए संविधान में व्यक्तिगत नागरिक स्वतंत्रता की संवैधानिक गारंटी और सुरक्षा प्रदान की गई है, जिसमें धर्म की आजादी, अस्पृश्यता को खत्म करना, और भेदभाव के सभी रूपों का उल्लंघन करना शामिल है। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं के लिए व्यापक आर्थिक और सामाजिक अधिकारों के लिए तर्क दिया और अनुसूचित जातियों (एससी) और अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के सदस्यों के लिए नागरिक सेवाओं, स्कूलों और कॉलेजों में नौकरियों के आरक्षण की व्यवस्था शुरू करने के लिए असेंबली का समर्थन जीता जो एक सकारात्मक कार्रवाई थी। constitution of india
  • स्वतंत्र भारत में जब राष्ट्रीय ध्वज पर विचार विमर्श किया जा रहा था, वह भीमराव अम्बेडकर “सविंधान ड्राफ्टिंग कमेटी” के अध्यक्ष ही थे। जिन्होंने राष्ट्रीय ध्वज में अशोक चक्र का सुझाव दिया था। उन्हीं की बदौलत आज तिरंगे में अशोक चक्र प्रदर्शित होता है।
  • अम्बेडकर ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 का विरोध किया, जिसमें जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा दिया गया था और उनकी इच्छाओं के खिलाफ संविधान में शामिल किया गया था।

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  • भीमराव अम्बेडकर के दूसरे शोध ग्रंथ ‘ब्रिटिश भारत में प्रांतीय वित्त का विकास’ के आधार पर देश में वित्त आयोग की स्थापना हुई।
  • उन्होंने अर्थशास्त्र पर तीन पुस्तकें लिखीं: एडमिनिस्ट्रेशन एंड फाइनेंस ऑफ दी इस्ट इंडिया कंपनी, द इव्हॅल्युएशन ऑफ प्रोविंशियल फाइनेंस इन ब्रिटिश इंडिया, द प्रॉब्लम ऑफ़ द रूपी : इट्स ओरिजिन एंड इट्स सोल्युशन।
  • वर्ष 1950 के दशक में भीमराव अम्बेडकर बौद्ध धर्म के प्रति आकर्षित हुए और बौद्ध भिक्षुओं के सम्मेलनों में भाग लेने के लिए श्रीलंका (तब सिलोन) गए। और 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर शहर में डॉ॰ भीमराव अम्बेडकर ने स्वयं और अपने समर्थकों के लिए एक औपचारिक सार्वजनिक धर्मांतरण समारोह का आयोजन किया। जिसमें सबसे पहले डॉ॰ अम्बेडकर ने अपनी पत्नी सविता एवं कुछ सहयोगियों के साथ भिक्षु महास्थवीर चंद्रमणी द्वारा पारंपरिक तरीके से त्रिरत्न और पंचशील को अपनाते हुए बौद्ध धर्म ग्रहण किया। Dr. Babasaheb Ambedkar as a Bhikkhu (Buddhist monk)
  • 6 दिसम्बर 1956 को, अम्बेडकर का मधुमेह की लम्बी बीमारी से मृत्यु (महापरिनिर्वाण) दिल्ली में उनके घर में हो गई। B.R.Ambedkar Mahaparinirvana Image Bhimrao Ambedker last rites
  • हर साल 20 लाख से अधिक लोग उनकी जयंती (14 अप्रैल), महापरिनिर्वाण यानी पुण्यतिथि (6 दिसम्बर) और धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस (14 अक्टूबर) को चैत्यभूमि (मुंबई), दीक्षाभूमि (नागपूर) तथा भीम जन्मभूमि (महू) में उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए इकट्ठे होते हैं।
  • अम्बेडकर के अनुयायियों द्वारा उन्हें आदर एवं सम्मान से ‘बाबासाहब’ (मराठी: बाबासाहेब) कहा जाता है, जो एक मराठी वाक्यांश है जिसका अर्थ “पिता-साहब”, क्योंकि लाखों भारतीय उन्हें “महान मुक्तिदाता” मानते हैं।
  • बाबा साहेब को सम्मान देते हुए कई सार्वजनिक संस्थानों एवं ग्यारह विश्वविद्यालयों के नाम उनके नाम पर रखे गए, जैसे कि :- डॉ॰ बाबासाहेब अम्बेडकर अंतर्राष्ट्रीय विमानक्षेत्र, डॉ॰ बी॰आर॰ अम्बेडकर राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, जालंधर, अम्बेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली, इत्यादि शामिल है।
  • भीमराव को हिस्ट्री टीवी 18 और सीएनएन आईबीएन द्वारा वर्ष 2012 में आयोजित एक चुनाव सर्वेक्षण “द ग्रेटेस्ट इंडियन” (महानतम भारतीय) में सर्वाधिक मत प्राप्त हुए थे। जिसमें लगभग 2 करोड़ मत डाले गए थे, इसके आधार पर उन्हें उस समय का सबसे लोकप्रिय भारतीय व्यक्ति माना जाने लगा।
  • भीमराव अम्बेडकर की 125 वीं जयंती संयुक्त राष्ट्र संघ में मनाई गई थी, जहां संघ ने उन्हें ‘विश्व का प्रणेता’ कहां था। United Nation Celebrate Dr. Bhimrao Ambedker 125th Birth Anniversary
  • वर्ष 2000 में, फिल्म निर्देशक जब्बार पटेल ने बाबा साहेब के जीवन चरित्र को प्रदर्शित करते हुए, एक फिल्म बनाई जिसका शीर्षक “डॉ॰ बाबासाहेब अम्बेडकर” था। Dr. Babasaheb Ambedkar Hindi film poster
  • 14 अप्रैल 2015 को, गुगल ने अपने होमपेज डुडल के माध्यम से अम्बेडकर के 124 वें जन्मदिन का जश्न मनाया था। यह डूडल भारत, अर्जेंटीना, चिली, आयरलैंड, पेरू, पोलैंड, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम में दिखाया गया था। Bhimrao ambedker Google doodle
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