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M. Karunanidhi Biography in Hindi | एम. करुणानिधि जीवन परिचय

एम. करुणानिधि से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ क्या एम. करुणानिधि धूम्रपान करते थे ?: नहीं क्या एम. करुणानिधि शराब पीते थे ?: नहीं करुणानिधि का जन्म एक गरीब ईसाई वेल्लार परिवार में हुआ था, जो अपनी आजीविका के लिए मंदिर पर निर्भर पर रहता था और परंपरागत रूप से नादाश्वरम नामक साज बजाते थे। स्कूली शिक्षा के दौरान उन्होंने नाटक, कविता और साहित्य में रूचि विकसित की। उन्होंने राजनीति में अपना पहला सबक तब सीखा जब वह संगीत की कक्षा लिए जाते थे, वहां उन्होंने जाति आधारित भेदभाव को महसूस किया और संगीत सीखना छोड़ दिया। हालांकि, उनके पिता चाहते थे कि वह अपने परिवार की संगीत परंपरा को जारी रखे, लेकिन वह ऐसा करने में असहमत थे। 14 वर्ष की उम्र में, उन्होंने जस्टिस पार्टी के अलागिरीस्वामी का एक भाषण देखा, जिससे वह इतने प्रेरित हुए कि उन्होंने भविष्य में राजनीति में प्रवेश करने का मन बना लिया। उनकी राजनीति तब शुरू हुई जब वह पेरियार के आत्म-सम्मान आंदोलन में छात्र कार्यकर्ता बने थे, जो द्रविड़ों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे। इसके बाद, उन्होंने 'तमिलनाडु तमिल मनावर मंडरम' नामक एक संगठन की स्थापना की, जो द्रविड़ आंदोलन का पहला छात्र विंग था। वर्ष 1937 में, उन्होंने अपनी राजनीतिक उपस्थिति तब महसूस की जब उन्होंने द्रविड़ आंदोलन के तहत "विरोधी हिंदी" आंदोलन का नेतृत्व किया था, उस समय हिंदी भाषा को स्कूलों में अनिवार्य कर दिया गया था। उनके व्याख्यात्मक कौशल, निबंध, समाचार पत्र लेख, और रंगमंच के नाटकों ने पेरियार में लेफ्टिनेंट सी. एन. अन्नादुरई का…

जीवन परिचय
पूरा नाम मुथुवेल करुणानिधि
वास्तविक नाम दक्षिणामूर्थी
उपनाम कलईगनर, डॉक्टर कलईगनर, द ग्रेट कम्युनिकेटर
व्यवसाय भारतीय राजनेता और लेखक
प्रसिद्ध हैं द्रमुक पार्टी का अध्यक्ष और द्रविड़ राजनीति का प्रतीक होने के नाते
शारीरिक संरचना
लम्बाई (लगभग)से० मी०- 165
मी०- 1.65
फीट इन्च- 5' 5”
वजन/भार (लगभग)65 कि० ग्रा०
आँखों का रंग काला
बालों का रंग श्वेत (अर्ध-गंजा)
राजनीति
राजनीतिक पार्टी द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम
राजनीतिक यात्रा वर्ष 1938- तिरुवारुर में एक हिंदी विरोधी विरोध का नेतृत्व करके सिर्फ 14 उम्र में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया। इसके बाद उन्होंने मनावर नेसन, एक हस्तलिखित समाचार पत्र को अपने साथी सदस्यों के साथ प्रसारित किया। उसके कुछ समय के बाद उन्होंने द्रविड़ आंदोलन के पहले छात्र विंग तमिलनाडु तमिल मनावर मंडरम को संगठित किया।
वर्ष 1949- वह द्रविड़ आंदोलन का प्रतीक बने और द्रमुक पार्टी के नेता के रूप में उभरे।
वर्ष 1957 - तमिलनाडु की तिरुचिरापल्ली जिले की कुलीथलाई लोकसभा सीट से विधानसभा के लिए विधायक के रूप में चुने गए।
वर्ष 1961 - राज्य विधानसभा में द्रमुक पार्टी के खजांची और विपक्ष के उप-नेता बने।
वर्ष 1967- डीएमके की सरकार में लोक निर्माण मंत्री बने।
वर्ष 1969 - पहली बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने और द्रमुक पार्टी के अध्यक्ष बने।

वर्ष 1971 - दूसरी बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने।
वर्ष 1976- आपातकाल के दौरान डीएमके सरकार को खारिज कर दिया गया।
वर्ष 1989- तीसरी बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने।

वर्ष 1996- चौथी बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने।

वर्ष 2006- पांचवी बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने।
सबसे बड़ा प्रतिद्वंदीजयललिता
व्यक्तिगत जीवन
जन्मतिथि 3 जून 1924
जन्मस्थान तिरुकुवालाई, तंजौर जिला, मद्रास प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत
मृत्यु तिथि 7 अगस्त 2018
मृत्यु स्थल कावेरी अस्पताल, चेन्नई, तमिलनाडु, भारत
आयु (मृत्यु के समय)94 वर्ष
मृत्यु कारण गंभीर बीमारी (मूत्र संक्रमण)
समाधि स्थल मरीना बीच
राशि मिथुन
हस्ताक्षर
राष्ट्रीयता भारतीय
गृहनगर चेन्नई, तमिलनाडु, भारत
स्कूल/विद्यालय बोर्ड हाई स्कूल, तिरुवुरुर
कॉलेज/महाविद्यालय/विश्वविद्यालय लागू नहीं
शैक्षणिक योग्यता आठवीं पास
डेब्यू तमिल फिल्म उद्योग - उनकी पहली फिल्म राजकुमारी थी, जिसके लिए उन्होंने वर्ष 1947 में स्क्रिप्ट लिखी थी, जिससे उन्हें इस क्षेत्र में काफी लोकप्रियता प्राप्त हुई थी।
राजनीति- वह जस्टिस पार्टी के अलागिरीस्वामी के भाषण से प्रेरित थे। जिसके चलते 14 वर्ष की आयु में उन्होंने राजनीति में प्रवेश किया और हिंदू आंदोलनों में भाग लिया।
धर्म हिन्दू
जाति इसाई वेल्ललर
खाद्य आदत शाकाहारी
पता नंबर 15, चौथी स्ट्रीट, गोपालपुरम, चेन्नई
शौक/अभिरुचि क्रिकेट देखना
पुरस्कार/सम्मान वर्ष 1971- अन्नामलाई विश्वविद्यालय द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित
1980 के दशक- राजराजन पुरस्कार पुस्तक 'तेनपंडी सिंगम' (1985) के लिए

वर्ष 2006- 40 वें वार्षिक दीक्षांत समारोह के अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल और मदुरै कामराज विश्वविद्यालय के कुलपति सुरजीत सिंह बरनाला ने मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया।
विवाद • सरकारिया आयोग ने वीरानम परियोजना के अंतर्गत निविदाओं के आवंटन में भ्रष्टाचार में शामिल होने के कारण करुणानिधि पर आरोप लगाए गए, जिसके चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उनकी सरकार को खारिज कर दिया था।
• वर्ष 2001 में, करुणानिधि, पूर्व मुख्य सचिव के.ए. नंबियार को चेन्नई में फ्लाईओवर के निर्माण में भ्रष्टाचार में संलिप्त पाते हुए गिरफ्तार किया गया था। आईपीसी की कई धाराओं के तहत उन पर और उनकी पार्टी के सदस्यों पर आरोप लगाए गए थे। हालांकि, उनके खिलाफ कोई कठोर साक्ष्य नहीं मिला सका था।
• वर्ष 2012 में, पार्टी के स्थापना दिवस का जश्न मनाते हुए करुणानिधि और पार्टी कार्यकर्ताओं का स्वागत करने के लिए हिंदू देवताओं की वेशभूषा में थे। जो उनके लिए अपमानजनक था।
• उन पर लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (एलटीटीई), एक आतंकवादी समूह के साथ संबंध बनाने का आरोप लगाया गया था। हालांकि, अंत में उनके खिलाफ साक्ष्य नहीं मिलने पर आरोपों से बरी कर दिया गया था।
प्रेम संबन्ध एवं अन्य जानकारियां
वैवाहिक स्थिति विवाहित
गर्लफ्रेंड एवं अन्य मामले राजति अम्मल
परिवार
पत्नी पहली पत्नी - पद्मावथी (वर्ष 1944 में मृत्यु)

दूसरी पत्नी - दयालु अम्मल (विवाह 1948 - 2018 मृत्यु तक)

तीसरी पत्नी - राजति अम्मल (वर्ष 1960 के दशक के अंत में विवाह - 2018 मृत्यु तक)
बच्चे बेटा - एम. के. अलागिरी (राजनीतिज्ञ, दयालु अम्मल से), एम. के. स्टालिन (राजनीतिज्ञ, दयालु अम्मल से), एम. के. तमिलरसु (निर्माता, दयालु अम्मल से)

एम. के. मुथू (पद्मवथी से)

बेटी - सेल्वी गीता कोविलम (दयालु अम्मल से), कनिमोझी (राजति से, राजनीतिज्ञ)

माता-पिता पिता - मुथुवेलार करुणानिधि
माता - अंजुगम करुणानिधि
भाई-बहन भाई - कोई नहीं
बहन - शनमुगसुंदरथ अम्मल, पेरियानयागम
वंश वृक्ष
पसंदीदा चीजें
पसंदीदा भोजन चावल उपमा घी के साथ छिड़काव
पसंदीदा क्रिकेटर कपिल देव, सचिन तेंदुलकर और महेंद्र सिंह धोनी
पसंदीदा अभिनेता एम. जी. रामचंद्रन
पसंदीदा रंग श्वेत
धन/संपत्ति संबंधित विवरण
कार संग्रह टोयोटा अल्फार्ड
घर/एस्टेट₹5 करोड़ (चल संपत्ति)
वेतन (लगभग)₹37 लाख प्रति वर्ष (वर्ष 2011 के अनुसार)
कुल संपत्ति (लगभग)₹45 करोड़ (वर्ष 2014 के अनुसार)

एम. करुणानिधि से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ

  • क्या एम. करुणानिधि धूम्रपान करते थे ?: नहीं
  • क्या एम. करुणानिधि शराब पीते थे ?: नहीं
  • करुणानिधि का जन्म एक गरीब ईसाई वेल्लार परिवार में हुआ था, जो अपनी आजीविका के लिए मंदिर पर निर्भर पर रहता था और परंपरागत रूप से नादाश्वरम नामक साज बजाते थे।

    करुणानिधि के बचपन की फोटो

  • स्कूली शिक्षा के दौरान उन्होंने नाटक, कविता और साहित्य में रूचि विकसित की।
  • उन्होंने राजनीति में अपना पहला सबक तब सीखा जब वह संगीत की कक्षा लिए जाते थे, वहां उन्होंने जाति आधारित भेदभाव को महसूस किया और संगीत सीखना छोड़ दिया। हालांकि, उनके पिता चाहते थे कि वह अपने परिवार की संगीत परंपरा को जारी रखे, लेकिन वह ऐसा करने में असहमत थे।
  • 14 वर्ष की उम्र में, उन्होंने जस्टिस पार्टी के अलागिरीस्वामी का एक भाषण देखा, जिससे वह इतने प्रेरित हुए कि उन्होंने भविष्य में राजनीति में प्रवेश करने का मन बना लिया।
  • उनकी राजनीति तब शुरू हुई जब वह पेरियार के आत्म-सम्मान आंदोलन में छात्र कार्यकर्ता बने थे, जो द्रविड़ों के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे थे। इसके बाद, उन्होंने ‘तमिलनाडु तमिल मनावर मंडरम’ नामक एक संगठन की स्थापना की, जो द्रविड़ आंदोलन का पहला छात्र विंग था।

    करुणानिधि युवावस्था के दौरान

  • वर्ष 1937 में, उन्होंने अपनी राजनीतिक उपस्थिति तब महसूस की जब उन्होंने द्रविड़ आंदोलन के तहत “विरोधी हिंदी” आंदोलन का नेतृत्व किया था, उस समय हिंदी भाषा को स्कूलों में अनिवार्य कर दिया गया था। उनके व्याख्यात्मक कौशल, निबंध, समाचार पत्र लेख, और रंगमंच के नाटकों ने पेरियार में लेफ्टिनेंट सी. एन. अन्नादुरई का ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने करुणानिधि को सार्वजनिक बैठकों को संबोधित करने का मौका दिया। उन्हें पहली पदोन्नति तब मिली, जब वह द्रविड़ कझगम पार्टी पत्रिका ‘कुडियारासु’ के संपादक बने थे।

    सी.एन. अन्नादुरई (बाईं ओर) पेरियार (दाईं ओर)

  • 9वीं कक्षा में विफल होने के बाद, उन्होंने अपनी पढ़ाई छोड़ दी और अपने सिनेमा करियर को एक पटकथा लेखक के रूप में शुरू करके अपने कला के प्रति प्रेम को पुनर्जीवित किया और कई कहानियां, नाटक और उपन्यास लिखे।
  • उन्होंने हमेशा द्रमुक के आधिकारिक अंग, मुरासोली (पत्रिका) को अपने पहले बच्चे के रूप में माना, जिसे उन्होंने 1942 में लॉन्च किया था।

    करुणानिधि की पत्रिका मुरासोली की 75 वीं वर्षगांठ

  • वर्ष 1940 में, उन्होंने पद्मावथी से विवाह किया, लेकिन 1944 में उनकी मृत्यु हो गई। चार साल बाद, उन्होंने दयालु अम्मल से दूसरी शादी की, जिनसे उन्हें तीन बेटे एम. के. अलागिरी, एम. के. स्टालिन, तमिलरासु और बेटी सेल्वी थी। इसके अलावा उनकी तीसरी पत्नीराजति अम्मल से उनकी एक बेटी कनिमोझी भी थी।
  • राजनीति में स्वयं को स्थापित करने के बाद, उन्होंने 20 साल की उम्र में तमिल फिल्मों के लिए स्क्रिप्ट लिखना शुरू किया। जिससे उन्हें फिल्म ‘राजकुमारी’ के लिए वर्ष 1947 में बहुत प्रसिद्धि मिली। एक पटकथा लेखक के रूप में, वह 1940 के दशक के अंत में ₹10,000 से अधिक महीने कमाते थे। उन्होंने अभिनेत्री रेखा के पिता शिवाजी गणेशन की पहली फिल्म ‘पराशक्ति’ (1952) की स्क्रिप्ट भी लिखी थी।

    करुणानिधि (बाईं ओर) सिवाजी गणेशन (दाईं ओर)

    करुणानिधि युवावस्था में जयललिता के साथ

  • वर्ष 1947 में भारत की आजादी के बाद, पेरियार का “एंटी-हिंदी” आंदोलन दो हिस्सों में बंट गया, जिसके बाद करुणानिधि ने वर्ष 1949 में द्रमुक पार्टी का गठन करते हुए, अन्नादुराई का समर्थन किया। जिसके चलते अन्नादुराई उनके “राजनीतिक गुरु” और द्रमुक पार्टी की विचारधारा बन गए। कांग्रेस का विरोध होना, करुणानिधि की महत्वाकांक्षाओं को पूरी तरह से अनुकूल बनाता था।

    करुणानिधि अन्नादुराई के साथ

  • शुरुआत में, वह द्रमुक पार्टी के लिए भाषण देते हुए पार्टी के लिए धन एकत्रित करते थे। जिसके चलते धीरे-धीरे पार्टी में उनका स्तर उच्च होता गया।
  • वर्ष 1957 में, वह पहली बार तिरुचिरापल्ली जिले की कुलीथलाई सीट से तमिलनाडु विधानसभा के लिए चुने गए थे और वर्ष 1961 में उन्हें डीएमके पार्टी का कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया एवं उसके एक साल बाद विधानसभा में विपक्ष के उप-नेता बने।

    करुणानिधि 1960 दशक में

  • वर्ष 1960 के दशक में उनका विवाहित जीवन दयालु अम्मल के साथ एक जीवन साथी के रूप में सुचारु रूप से चल रहा था। उसी दौरान उनकी शादी एक ऐसे मोड़ पर जा पहुंची जब करुणानिधि ने राजति अम्मल की बेटी कनिमोझी को अपनी बेटी के रूप में संदर्भित किया। करुणानिधि को पता था कि वह हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 के अनुसार राजति अम्मल से विवाह नहीं कर सकते हैं, क्योंकि अधिनियम के अनुसार वह शादी अवैध होगी। इसलिए उन्होंने डीएमके की नई विवाह प्रणाली “स्वयं मर्यादा कल्याणम” बनाई और उसके तहत राजति से विवाह किया।
  • वर्ष 1969 में, अन्नादुरई की मौत के बाद, करुणानिधि उनके उत्तराधिकारी बने और अपने सबसे करीबी दोस्त एम. जी. रामचंद्रन की सहायता से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने।

    एम.करुणानिधि (बाईं ओर) अपने मित्र एम. जी. रामचंद्रन (दाईं ओर) के साथ

  • उसी वर्ष, तमिलनाडु में सूखा पड़ने पर, उन्होंने तत्कालीन उप-प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री मोरारजी देसाई से मुलाकात की और सूखे से राहत पाने के लिए ₹5 करोड़ की राहत निधि के लिए अनुरोध किया। जिस पर मोरारजी देसाई ने जवाब दिया,”मेरे बगीचे में कोई पैसों वाला पेड़ नहीं है, जिससे पैसे तोड़कर तुम्हे दे दूंगा।” इतना सुनने पर करूणानिधि ने व्यंग्यात्मक तौर पर जवाब दिया,”जब पैसों का कोई पेड़ होता ही नहीं तो आपके बगीचे में कैसे होगा।”

    मोरारजी देसाई

  • वर्ष 1971 में, उनके नेतृत्व में द्रमुक पार्टी ने तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में अपनी पहली बड़ी जीत दर्ज की और अगले ही वर्ष एम. जी. रामचंद्रन द्रमुक पार्टी से अलग हो गए, क्योंकि वह एक कैबिनेट मंत्री बनना चाहते थे। लेकिन कैबिनेट मंत्री न बने जाने पर उन्होंने स्वयं की नई पार्टी “एआईएडीएमके” का गठन किया।
  • वर्ष 1960 के दशक के अंत में, करुणानिधि एक दुर्घटना में घायल हुए, जिसमें उनकी बाईं आँख क्षतिग्रस्त हो गई थी। तब से, उन्होंने चिकित्सक की सलाह पर काले रंग का चश्मा पहनना शुरू किया।

    एम. करुणानिधि चश्मा लगाते हुए

  • वर्ष 1975 में, उनकी आत्मकथा ‘निंजुकु नेथी’ 6 खंडों में प्रकाशित हुई।

    एम. करुणानिधि की आत्मकथा निंजुकु नेथी

  • वर्ष 1975 में, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत में “आपातकाल” लगाया, तब करुणानिधि की सरकार अन्य राज्य सरकारों की तरह वर्ष 1976 में खारिज कर दी गई थी। वर्ष 1977 के चुनावों में, एम. जी. रामचंद्रन के नेतृत्व में एआईएडीएमके पार्टी ने द्रमुक पार्टी को सत्ता से निरस्त किया। वर्ष 1989 में एम. जी. रामचंद्रन की मृत्यु के बाद द्रमुक पार्टी ने 13 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद सत्ता में पुनः वापसी की।

    एम. करूणानिधि आपातकाल के दौरान

  • वर्ष 1980 में, उन्होंने महान मुक्केबाज मोहम्मद अली से मुलाकात की, जब वह एक अतिथि मैच के लिए चेन्नई आए हुए थे।

    एम. करूणानिधि और अपनी पत्नी दयालु अम्मल और महान मुक्केबाज मोहम्मद अली की पत्नी वरोनिका के साथ

  • उसी वर्ष, 25 मार्च को तमिलनाडु विधानसभा में एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई जब जयललिता विपक्ष की नेता थी और करुणानिधि मुख्यमंत्री थे। विधानसभा के सभी सदस्य डीएमके और एआईएडीएमके के बीच अपशब्दों के घमासान युद्ध को देख रही थी। जब जयललिता ने अपनी साड़ी की ओर इशारा किया और कहा, “मेरी साड़ी खींची गई और फाड़ा गया,” और डीएमके कैबिनेट के तत्कालीन मंत्री दुरई मुरुगन और उनके सहयोगी वीरपांडी अरुमुगम ने उसे “शर्मनाक” बताया। वर्ष 1991 के चुनाव अभियान में इस घटना का उपयोग करते हुए, जयललिता ने राजनीतिक लाभ उठाया, जिसने तमिलनाडु की राजनीति को बदल दिया।

    जयललिता साड़ी घटना

  • करुणानिधि ने विश्व शास्त्रीय तमिल सम्मेलन 2010 के लिए आधिकारिक थीम गीत ‘सेमोजोजियाना तामिज़ मोजियायाम’ लिखा, जिसे ए.आर. रहमान ने गाया था।

  • कला और साहित्य में बेहतरीन प्रदर्शन और रूचि के लिए करुणानिधि को प्यार से “कलईगनर” भी कहा जाता है।
  • 61 वर्षों से अधिक के अपने राजनीतिक करियर में वह कभी भी चुनाव नहीं हारे। वर्ष 1991 चुनावों में उन्हें काफी संघर्ष देखने को मिला, जिसमें वह सिर्फ 890 मतों के अंतर से चुनाव जीते थे।
  • उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री के रूप में कई लोकप्रिय योजनाएं और कल्याणकारी कार्यक्रम जैसे “कलईगनर कपपीतु थितम” (एक स्वास्थ्य योजना), वरुमन कप्पम (स्वास्थ्य जांच शिविर), उज्जवार संधियों (किसानों के लिए बाजार व्यवस्था), नमक्कु नामे थितम (स्वयं-पर्याप्तता), अनथुथ ग्रामा अन्ना मारुमालार्ची थितम (ग्राम पंचायत में संसाधनों का विकास), मोवलुर राममर्थम (गरीब महिलाओं को शादी सहायता प्रदान करना, मध्याह्न भोजन कार्यक्रम, छात्रों के लिए मुफ्त बस पास और सहकारी ऋणों की छूट), इत्यादि को लागू किया।
  • वह योगासन भी करते थे, जिसे वह अन्ना अर्यारायम से सुबह 4:30 बजे से शुरू करते थे।
  • वह एक कुत्ता प्रेमी भी थे, जिसके चलते उनके पालतू कुत्ते का नाम “खन्ना” है।

    करूणानिधि अपने कुत्ते के साथ

  • वर्ष 2008 में, उन्हें पीठ दर्द की परेशानी से गुजरना पड़ा। जिसके चलते वर्ष 2009 में उन्होंने एक शल्य चिकित्सा के माध्यम से पीठ दर्द का इलाज करवाया, जो सफल नहीं हो सका और जिसके कारण जीवन के बाकी दिन वह व्हीलचेयर पर रहे।

    एम. करूणानिधि व्हीलचेयर पर

  • तमिलनाडु के सबसे बड़े मीडिया हाउसों में से एक उनके द्वारा संचालित सन टीवी और कलिगनर टीवी भी है।
  • उन्होंने अपने बेटे एम. के. स्टालिन को अपने राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में घोषित किया, जिसका नाम उन्होंने जोसेफ स्टालिन (एक सोवियत क्रांतिकारी) के नाम पर रखा था, जिसकी एम. के. स्टालिन के जन्म के 4 दिन बाद मृत्यु हो गई थी।
  • वर्ष 2016 में, उन्होंने अपनी आखिरी हार का सामना किया, तब किया जब द्रमुक पार्टी ने एआईएडीएमके के खिलाफ विधानसभा चुनावों में परिवार पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों विशेष रूप से 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले के कारण।
  • 7 अगस्त 2018 को, 6:40 बजे यह घोषणा की गई कि एम. करुणानिधि की मृत्यु हो गई और चेन्नई में मरीना बीच के अन्ना मेमोरियल में उनके पार्थिव शरीर को रखा गया था।

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