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Mahashay Dharampal Gulati (MDH) Biography in Hindi | महाशय धर्मपाल गुलाटी (एम. डी. एच) जीवन परिचय

महाशय धर्मपाल गुलाटी

जीवन परिचय
वास्तविक नाम महाशय धर्मपाल गुलाटी
उपनाम मसाला किंग, दादाजी, महाशयजी, मसालों के राजा
व्यवसाय व्यवसायी
प्रसिद्ध हैं एमडीएच मसालों के मालिक होने के नाते
महाशय गुलाटी एमडीएच मसाले
शारीरिक संरचना
लम्बाई (लगभग)से० मी०- 170
मी०- 1.70
फीट इन्च- 5' 7"
वजन/भार (लगभग)65 कि० ग्रा०
आँखों का रंग काला
बालों का रंग श्वेत
व्यक्तिगत जीवन
जन्मतिथि 27 मार्च 1923
आयु (2018 के अनुसार)95 वर्ष
जन्मस्थान सियालकोट, उत्तर-पूर्व पंजाब, पाकिस्तान
राष्ट्रीयता भारतीय
गृहनगर दिल्ली, भारत
राशि मेष
स्कूल/विद्यालय ज्ञात नहीं
कॉलेज/विश्वविद्यालय/महाविद्यालय ज्ञात नहीं
शैक्षणिक योग्यता पांचवी पास (पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी)
धर्म हिन्दू
जाति खत्री
पता (कार्यालय)9/44, औद्योगिक क्षेत्र, कीर्ति नगर, दिल्ली - 110015
महाशय गुलाटी अपने कार्यालय में
शौक/अभिरुचि पतंग उड़ाना, पहलवानी करना, कबूतरबाजी करना
पुरस्कार एवं सम्मान वर्ष 2016 - एबीसीआई वार्षिक पुरस्कारों में 'इंडियन ऑफ़ द ईयर'
महाशय गुलाटी एबीसीआई वार्षिक पुरस्कारों में 'इंडियन ऑफ़ द ईयर' पुरस्कार के साथ
वर्ष 2017- लाइफटाइम अचीवमेंट के लिए उत्कृष्टता पुरस्कार
महाशय गुलाटी लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार के साथ
वर्ष 2017- एफएमसीजी क्षेत्र में सबसे ज्यादा भुगतान करने वाले सीईओ (₹21 करोड़ / वर्ष)
प्रेम संबन्ध एवं अन्य मामलें
वैवाहिक स्थिति विदुर
विवाह तिथि वर्ष 1941
परिवार
पत्नी लीलावन्ती
महाशय गुलाटी अपनी पत्नी लीलावन्ती के साथ
बच्चे बेटा - संजीव गुलाटी
महाशय गुलाटी का बेटा संजीव गुलाटी
बेटी - 6 (नाम ज्ञात नहीं)
माता-पिता पिता - महाशय चुन्नी लाल
माता - माता चानन देवी
महाशय धर्मपाल गुलाटी अपने परिवार के साथ
भाई-बहन भाई- सतपाल गुलाटी एवं धर्मवीर गुलाटी
बहन- 5 (नाम ज्ञात नहीं)
पसंदीदा चीज़ें
पसंदीदा भोजन पंजाबी व्यंजन
धन संबंधित विवरण
कार संग्रह क्रिसलर लिमो
महाशय गुलाटी अपनी क्रिसलर लिमो कार के साथ
घर/एस्टेट एमडीएच में 80% हिस्सेदारी, 15 कारखानों, 20 स्कूलों, 1 अस्पताल के मालिक हैं।
आय (लगभग) ₹21 करोड़ / वर्ष (वर्ष 2017 के अनुसार)
कुल संपत्ति (लगभग) ₹940 करोड़

महाशय गुलाटी

 

महाशय धर्मपाल गुलाटी से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ

  • गुलाटी का जन्म पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था, जहां उनके पिता “महाशियाँ दी हट्टी” नामक एक दुकान से मसाले बेचने का कार्य करते थे।
  • वह आर्य समाज के बहुत बड़े अनुयायी हैं।
  • 10 वर्ष की उम्र में, उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा छोड़ दी (जब वह पांचवी कक्षा में थे) और अपने पिता की दुकान पर कार्य करना शुरू कर दिया।
  • 7 सितंबर 1947 को, वह भारत-पाक विभाजन के बाद अपने परिवार के साथ पाकिस्तान से दिल्ली, भारत लौट आए।
  • उसके बाद, वह दिल्ली के करोल बाग़ में अपनी भतीजी के घर पर रहने लगे, जहां पानी, बिजली की आपूर्ति नहीं थी।
  • जब वह दिल्ली आए, तब उनके पिता ने उन्हें ₹1500 दिए थे, जिसमें से धर्मपाल गुलाटी ने ₹650 का तांगा (घोडा गाड़ी) खरीद लिया और कनॉट प्लेस से करोल बाग़ तक यात्रियों से 2 आने लेते थे।

    भारतीय मुद्रा 2 आने

    भारतीय मुद्रा 2 आने

  • उन्हें अपनी आजीविका के लिए पर्याप्त रूप से साबित नहीं होने के कारण अक्सर अपमानित होना पड़ता था। इसलिए उन्होंने अपनी तांगा (घोडा गाड़ी) को बेच दिया और अजमल खान सड़क के किनारे एक छोटी सी दुकान बनाई और अपने परिवार का पुराना कारोबार मसालों को बेचना शुरू किया।

    धर्मपाल गुलाटी 1950 के दशक में राज कपूर के साथ

    धर्मपाल गुलाटी 1950 के दशक में राज कपूर के साथ

  • प्रारंभ में सफलता के बाद, उन्होंने वर्ष 1953 में चांदनी चौक में एक और दुकान किराए पर ली, जिसके चलते वर्ष 1959 में उन्होंने स्वयं की फैक्ट्री स्थापित करने के लिए कीर्ति नगर में जमीन खरीदी, जहां उन्होंने एमडीएच मसालों के साम्राज्य यानि महाशियां दी हट्टी लिमिटेड की स्थापना की, जिसका अर्थ है “एक महानुभाव आदमी की दुकान” पंजाबी में।

    एमडीएच दुकान, करोल बाग दिल्ली में

    एमडीएच दुकान, करोल बाग दिल्ली में

  • एमडीएच स्विट्ज़रलैंड, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, कनाड़ा, यूरोपीय देशों, इत्यादि में मसालों का निर्यात करता है।
  • वर्तमान में, एमडीएच भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में मसालों की श्रेणी में सबसे बड़े ब्रांडों में से एक के रूप में उभरा है, जिसका 90 साल की उम्र पार करने के बाद भी धर्मपाल गुलाटी स्वयं एमडीएच उत्पादों का विज्ञापन करते हैं।

  • एमडीएच 50 से भी अधिक विभिन्न उत्पादों को बेचता है।
  • उनके द्वारा “महाशय चुन्नीलाल चैरिटेबल ट्रस्ट” चलाई जा रही है, जिसके अंतर्गत 250 बिस्तरों वाला एक अस्पताल और झोपड़पट्टी के निवासियों के लिए एक मोबाइल अस्पताल चलाया जा रहा है। इसके अलावा दिल्ली में 4 स्कूल भी चलाता है। इस ट्रस्ट के द्वारा वित्तीय सहायता भी सामाजिक संगठनों को दी जाती है।
  • एमडीएच संदेश पत्रिका भी चलाता है, जो भारत के पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों को प्रदर्शित करता है।

    संदेश पत्रिका

    संदेश पत्रिका

  • वह अपनी सेहत के प्रति काफी सजग रहते हैं, जिसके चलते वह सुबह 5 बजे योगा करते हैं।

    महाशय धर्मपाल गुलाटी कसरत करते हुए

    महाशय धर्मपाल गुलाटी कसरत करते हुए

  • उन्होंने अपनी आत्मकथा को जारी किया है, जिसमें उनके प्रारंभिक बचपन से लेकर सफलता के पीछे के रहस्य का खुलासा किया गया है।

    महाशय गुलाटी की आत्मकथा

    महाशय गुलाटी की आत्मकथा

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